मौसमी संकट और आपदाएँ (मौसम संबंधी खतरे और आपदाएँ) प्रकृत्तिजन्य अप्रत्याशित ऐसी सभी घटनाएँ जो प्राकृतिक प्रक्रमों को इतना तीव्र कर देती हैं कि विनाश की स्थिति उत्पन्न होती है, चरम प्राकृतिक घटनाएँ या आपदा कहलाती है। इन चरम घटनाओं या प्रकोपों से मानव समाज, जन्तु एवं पादप समुदाय को अपार क्षति होती है। चरम घटनाओं में ज्वालामुखी विस्फोट, दीर्घकालिक सूखा, भीषण बाढ़, वायुमण्डलीय चरम घटनाएँ; जैसे- चक्रवात, तड़ित झंझा, टॉरनेडो, टाइफून, वृष्टि प्रस्फोट, ताप व शीत लहर, हिम झील प्रस्फोटन आदि शामिल होते हैं। प्राकृतिक और मानव जनित कारणों से घटित होने वाली सम्पूर्ण वायुमण्डलीय एवं पार्थिव चरम घटनाओं को प्राकृतिक आपदा कहा जाता है। इन आपदाओं से उत्पन्न विनाश की स्थिति में धन-जन की अपार हानि होती है। प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं का वर्णन निम्न प्रकार है:- चक्रवात (Cyclone) 30° उत्तर से 30° दक्षिण अक्षांशों के बीच उत्पन्न होने वाले चक्रवातों को उष्णकटिबन्धीय चक्रवात कहते हैं। ये आयनवर्ती क्षेत्रों में पाए जाने वाला एक निम्न वायुदाब अभिसरणीय परिसंचरण तन्त्र होता है। इस चक्रवात का औसत व्यास लगभग 640 किमी...
वायूफोटोचित्र तथा प्रतिबिम्ब का अन्तर
(Difference between Air photograph and Image)
दूरसंवेद में चित्रीय दत्त प्राप्त करने की दो विधियाँ होती हैं () फोटो माफिया विधि (photographic method) तथा (M) इलेक्ट्रॉनिक विधि (electronic method) । 'प्रतिबिम्ब' तथा 'फोटो चित्र' शब्दों का सही-सही अर्थ समझने के लिये उपर्युक्त दोनों विधियों का भेद जानना आवश्यक है।
[।] फोटोग्राफीय विधि
(Photographic method)
इस विधि में किसी सामान्य कैमरे के भीतर एक ऐसी पारदर्शी फिल्म का प्रयोग करते हैं जिसकी सतह पर प्रकाश के प्रति संवेदनशील (light-sensitive) पदार्थ का महीना लेप चढ़ा होता है। यह लेप दृश्य-क्षेत्र से परावर्तित विद्युत-चुम्बकीय ऊर्जा के भिन्न-भिन्न आवेगों से भिन्न-भिन्न मात्रा में रासायनिक अभिक्रिया (chemical reaction) करके फिल्म की सतह पर उस दृश्य-क्षेत्र का नेगेटिव चित्र (negative picture) अंकित कर देता है। चूंकि कैमरे के भीतर लगी फिल्म ने आवेगों का संवेदन (sensing) तथा उनकी रासायनिक अभिक्रिया से उत्पन्न चित्र का अभिलेखन (recording), दोनों कार्य किये हैं इसलिये इस विधि के द्वारा प्राप्त नेगेटिव के पॉजिटिव प्रिन्ट (positive print) को फोटो चित्र' अथवा 'प्रतिबिम्ब' दोनों नामों में किसी भी नाम से सम्बोधित किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, फोटो चित्र अथवा प्रतिबिम्ब कहलाने के लिये किसी चित्रीय उत्पाद के संवेदन व अभिलेखन दोनों का एक ही माध्यम होना अनिवार्य है। यदि ये माध्यम अलग-अलग हैं जैसा कि नीचे लिखी गई इलेक्ट्रॉनिक विधि में होता है, तो सम्बंधित चित्रीय उत्पाद को केवल प्रतिबिम्ब नाम से पुकारा जायेगा तथा उसे फोटोचित्र कहना त्रुटिपूर्ण माना जायेगा।
[।।] इलेक्ट्रॉनिक विधि
(Electronic method)
इस विधि के द्वारा चित्रीय उत्पाद प्राप्त करने के लिये सुमाही फिल्म (sensitive film) के बजाय किसी इलेक्ट्रॉनिक संवेदक (electronic sensor) को प्रयोग में लाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक संवेदक को तापीय संवेदक (thermal sensor) भी कहते हैं। वीडियो कैमरा (video camera) ऐसे संवेदकों का अच्छा उदाहरण है। इस प्रकार का कोई इलेक्ट्रॉनिक या तापीय संवेदक दृश्य-क्षेत्र से परावर्तित विद्युत-चुम्बकीय आवेगों को तदनुरूपी विद्युत-संकेतों (electric signal) के रूप में, अपने भीतर लगे एक चुम्बकीय टेप या फीते (magnetic tape) पर स्थानान्तरित कर देता है। जब हम इस वीडियो टेप को किसी वी. सी. आर.अथवा वी. सी. पी. में रखकर 'प्ले' करते हैं तो इसके विद्युत संकेत टेलीविजन के पर्दे पर सम्बंधित दृश्य-क्षेत्र के चित्र के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। टेलीविजन के पर्दे पर प्रकट इस चित्र का ऊपर लिखी गई फ़ोटो ग्राफीय विधि के अनुसार किसी सामान्य कैमरे की सहायता से सुग्राही फिल्म पर अभिलेखन कर लिया जाता है। यहाँ यह बात पुनः भली-भाँति समझ लेनी चाहिए कि इस विधि में दृश्य-क्षेत्र के मौलिक आवेदन के लिये किसी इलेक्ट्रॉनिक संवेदक को प्रयोग में लाते हैं तथा सुग्राही फिल्म का कार्य केवल टेलीविजन के पर्दे पर प्रकट चित्र के अभिलेखन तक सुमित रहता है। अतः संवेदन व अभिलेखन के माध्यम अलग-अलग होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक विधि से प्राप्त चित्रीय उत्पाद को केवल प्रतिबिम्ब नाम से सम्बोधित करते हैं।
उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि दूरसंवेद में फोटो चित्र सहित सभी प्रकार के चित्रीय उत्पादों को प्रतिबिम्बों (images) की संज्ञा पा जा सकती है, परन्त सभी प्रतिबिम्बों को फोटो चित्र नहीं कहा जा सकता।
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